भारत की डिजिटल भुगतान तस्वीर में अब एक नया नाम जुड़ गया है। टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार रोलआउट 29 सितंबर 2026 को शुरू हुआ, और Apple ने 30 सितंबर को इसकी घोषणा की। सवाल यह है कि भारत में यह असल में क्या देता है, बाकी देशों में कैसे काम करता है, और UPI के दबदबे वाले बाज़ार में इसकी आगे की राह क्या है?
भारत में अभी क्या मिला है
शुरुआत में सिर्फ़ Axis Bank के Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड जुड़ सकते हैं। RuPay नेटवर्क और UPI फ़िलहाल समर्थित नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक HDFC Bank, ICICI Bank और SBI Card व्यावसायिक शर्तों पर बातचीत के कारण लॉन्च के साथ नहीं जुड़े हैं। सेवा iPhone, iPad और Apple Watch पर उपलब्ध है, जबकि Mac का समर्थन जल्द आएगा। इसके लिए iPhone XR या बाद का मॉडल और iOS 18 चाहिए। Apple के अनुसार Blinkit, Chaayos, Croma, Ixigo, Reliance ब्रांड, Tata 1mg, Zomato और Apple Store जैसे स्थानों पर यह चलेगा। Paytm, PayU, Pine Labs और Razorpay जैसे पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर इससे जुड़े हैं। ग्राहक Wallet ऐप में प्लस बटन से या Axis Bank के ऐप से कार्ड जोड़ सकते हैं। कार्ड के रिवॉर्ड पहले की तरह मिलेंगे, और Apple उपयोगकर्ता से कोई शुल्क नहीं लेता।
कैसे काम करता है: कार्ड नंबर नहीं, टोकन चलता है
दुकान पर भुगतान के लिए आई फ़ोन का साइड बटन दो बार दबाइए, Face ID, Touch ID या पासकोड से पहचान कराइए और फ़ोन या घड़ी को कॉन्टैक्टलेस रीडर के पास ले जाइए। न PIN की जरूरत है, न OTP की। असली कार्ड नंबर न फ़ोन में रहता है, न Apple के सर्वर पर, और न दुकानदार को मिलता है। इसकी जगह एक अलग डिवाइस अकाउंट नंबर बनता है, जो फ़ोन की सुरक्षित चिप में एन्क्रिप्टेड रखा जाता है। Visa और Mastercard की टोकनाइज़ेशन तकनीक हर लेनदेन को सुरक्षित बनाती है। फ़ोन खो जाए तो Find My से भुगतान निलंबित किया जा सकता है।
अमेरिका और बाकी देशों में क्या अलग है
बुनियादी तकनीक वही है, यानी NFC और टोकन, पर दुनिया में सुविधाएँ ज्यादा हैं। Apple के अनुसार यह 90 से अधिक देशों और क्षेत्रों में चलता है और 11,000 से ज्यादा बैंक व नेटवर्क पार्टनर इससे जुड़े हैं। अमेरिका में Apple Cash के ज़रिये पैसे भेजने और माँगने, Affirm और Klarna जैसे विकल्पों से किस्तों में भुगतान, डिजिटल कार की-ज़ और कुछ राज्यों में Wallet के भीतर डिजिटल ID की सुविधा है। Express Transit के ज़रिये मेट्रो या बस में फ़ोन अनलॉक किए बिना किराया दिया जा सकता है, जो लंदन, टोक्यो, हांगकांग और अमेरिका के कई शहरों में चलता है। दुकानदार Tap to Pay on iPhone से बिना अलग मशीन भुगतान ले सकते हैं, पर यह हर बाज़ार में एक जैसा नहीं है।
UPI के देश में Apple Pay की जगह
बिज़नेस स्टैंडर्ड के आँकड़े चित्र साफ़ करते हैं। अगस्त में UPI पर 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनका मूल्य 29.82 लाख करोड़ रहा। क्रेडिट कार्ड से 63.2 करोड़ भुगतान हुए, जो 2.02 लाख करोड़ के थे। देश में क्रेडिट कार्ड 12.4 करोड़ से ज्यादा हैं। यानी Apple Pay का दायरा छोटा है, पर बढ़ रहा है। साथ ही NPCI ने इसी महीने UPI Tap & Pay शुरू किया है, जो NFC से सीधे बैंक खाते का भुगतान कराता है। 15 अक्टूबर से 2,000 से ऊपर के चुनिंदा UPI व्यापारिक भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, जबकि क्रेडिट कार्ड पर यह आमतौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत होता है। यह शुल्क दुकानदार देता है, ग्राहक नहीं।
आगे भारत में क्या आ सकता है
फ़िलहाल जो पुष्ट है, वह इतना है कि और बैंक जुड़ेंगे और Mac पर सेवा आएगी। HDFC और ICICI से बातचीत की खबरें हैं, पर घोषणा अभी नहीं हुई। 2023 में टेकक्रंच ने बताया था कि Apple UPI QR स्कैनिंग का रास्ता खोज रहा है, पर यह लॉन्च में शामिल नहीं है। Apple Cash, किस्तों, कार की-ज़ और डिजिटल ID के भारत आने की कोई घोषणा नहीं हुई, इसलिए इन्हें संभावना ही मानें।