Politics

मीरापुर विधानसभा में राजनीतिक हलचल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मीरापुर सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है।

पश्चिम यूपी की मीरापुर सीट पर 2.99 लाख मतदाता हैं। यहाँ सबसे बड़ा मतदाता वर्ग मुस्लिम समाज (~36%) का है, जिसके बाद अनुसूचित जाति (~20%), जाट (~12%) और गुर्जर (~10%) की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा पाल, सैनी, कश्यप और प्रजापति समाज के मतदाता भी चुनाव का रुख तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

रालोद-एनडीए गठबंधन में सबसे मजबूत दावेदारी वर्तमान विधायक मिथलेश पाल की मानी जा रही है। उनके पक्ष में दो प्रमुख बातें जाती हैं—पहला, क्षेत्र की पुरानी मांग को पूरा करते हुए मोरना चीनी मिल के आधुनिकीकरण के लिए 261.91 करोड़ रूपए की सरकारी स्वीकृति और दूसरा, प्रदूषण जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाना।  उनके अलावा बिजनौर सांसद चंदन चौहान की पत्नी यशिका चौहान का नाम भी चर्चा में प्रमुखता से शामिल है। साथ ही विधायक प्रतिनिधि सुप्रिया पाल की सक्रियता भी पार्टी के भीतर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है।

समाजवादी पार्टी के खेमे में जिलाध्यक्ष जिया चौधरी सबसे स्पष्ट दावेदार के रूप में उभरे हैं। उनके साथ ही 2024 की प्रत्याशी सुम्बुल राणा और पूर्व सांसद कादिर राणा भी मजबूती से सक्रिय हैं। पुराने नेता लियाकत अली और मेहराजुद्दीन भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस से सलमान सईद और आजाद समाज पार्टी से जाहिद हुसैन प्रमुख नाम हैं।

क्षेत्र में विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और गन्ना किसानों के मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। मोरना चीनी मिल के आधुनिकीकरण के लिए जारी बजट और टिकोला मिल के भुगतान जैसे मुद्दों को एनडीए अपनी उपलब्धि के रूप में देख रहा है। वहीं विपक्षी दल स्थानीय सुविधाओं और रोजगार को लेकर अपने दावे कर रहे हैं।

मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार मीरापुर में एनडीए-रालोद गठबंधन काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में कानून-व्यवस्था और सुशासन का असर क्षेत्र की जनता में सकारात्मक संदेश दे रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की किसान-युवा केंद्रित राजनीति ने सर्वसमाज को गठबंधन से जोड़ने का काम किया है। शीर्ष नेतृत्व के प्रति जनता के इसी विश्वास के चलते अभी मीरापुर सीट पर एनडीए का पलड़ा बेहद भारी दिखाई दे रहा है। हालांकि 2027 तक प्रत्याशी चयन, स्थानीय मुद्दे, किसान मतदाताओं का रुख और गठबंधनों की रणनीति सीट के अंतिम राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकती है।

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