Politics

भाजपा का चंडीगढ़ में महासम्मेलन

1984 के पीड़ितों, प्रमुख अधिवक्ताओं और पूर्व न्यायाधीशों की मौजूदगी में चार दशक के संघर्ष और सामाजिक सरोकारों पर होगा दिनभर गंभीर मंथन।

भारतीय जनता पार्टी सिख समुदाय के साथ अपने वैचारिक और सामाजिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चंडीगढ़ में एक विशाल सिख कॉन्क्लेव का आयोजन करने जा रही है। 4 नवंबर को आयोजित होने वाला यह एक दिवसीय महासम्मेलन मुख्य रूप से 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों, उनके परिवारों और चार दशकों से जारी न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई को समर्पित रहेगा। पंजाब के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और भविष्य के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम को पार्टी के सबसे बड़े सामाजिक संपर्क अभियानों में से एक माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक सम्मेलन का मुख्य आकर्षण वे पीड़ित परिवार होंगे जिन्होंने 1984 की भीषण हिंसा का दंश झेला है। पीड़ितों को सम्मानपूर्वक मंच प्रदान करने के साथ-साथ इस कार्यक्रम में उन प्रख्यात वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने बिना थके अदालतों में पीड़ितों के हक की पैरवी की है। इसके अतिरिक्त, इस त्रासदी से जुड़े संवेदनशील मामलों में ऐतिहासिक और साहसिक फैसले सुनाने वाले पूर्व न्यायाधीशों की उपस्थिति भी इस कॉन्क्लेव की गंभीरता और प्रमाणिकता को एक नई गरिमा प्रदान करेगी।

इस महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव में भाजपा के वरिष्ठ केंद्रीय व राज्य स्तरीय सिख नेता, साथ ही सिख बुद्धिजीवी, इतिहासकार और विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

भाजपा इस आयोजन के माध्यम से सिख समाज के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराने की रूपरेखा तैयार कर रही है। केंद्र सरकार के स्तर पर 1984 के मामलों की पुनः जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन, बंद मामलों को दोबारा खुलवाना और लंबे समय से लंबित न्याय की प्रक्रिया को गति देना ऐसे कदम रहे हैं जिन्हें पार्टी प्रमुखता से उजागर करती रही है। इसके साथ ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, हेमकुंड साहिब तक सुगम मार्ग की व्यवस्था और गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में 'वीर बाल दिवस' घोषित करने जैसे निर्णयों ने पार्टी के इस सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा राज्य में स्वतंत्र और मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। पंजाब की राजनीति की धुरी हमेशा से सिख समुदाय के सरोकारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, ऐसे में चंडीगढ़ का यह कॉन्क्लेव पार्टी को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के प्रबुद्ध सिख वर्ग तक सीधे अपनी बात पहुंचाने का एक व्यापक मंच प्रदान करेगा।

यह पूरा दिन विचार-विमर्श, संवेदनाओं के आदान-प्रदान और भविष्य की रणनीति के नाम रहेगा। विभिन्न सत्रों में दंगों के बाद पुनर्वास, कानूनी अड़चनों, सामाजिक सुरक्षा और समुदाय के समग्र विकास पर गंभीर मंथन होगा। कुल मिलाकर, 4 नवंबर का यह कॉन्क्लेव केवल एक राजनीतिक सम्मेलन न होकर सिख समाज के ऐतिहासिक घावों पर मरहम लगाने और विकास के नए रास्ते तलाशने की दिशा में एक अहम कड़ी साबित हो सकता है।

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