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दिल्ली के उपराज्यपाल को मिली नई शक्तियां, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ा दिया है, उन्हें बोर्ड और पैनल बनाने तथा सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार दिया गया है।

दिल्ली में राजनीतिक हलचल के बीच केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की शक्तियों में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को नए अधिकार दिए हैं, जिनके तहत वे किसी भी प्राधिकरण, बोर्ड, आयोग या वैधानिक निकाय का गठन करने के साथ-साथ इन निकायों में सदस्यों की नियुक्ति भी कर सकेंगे। यह अधिसूचना केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई।

नया आदेश और उसके प्रभाव

राष्ट्रपति के आदेश के अनुसार  उपराज्यपाल अब विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी निकायों के गठन और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सीधे शामिल होंगे। इससे पहले यह जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की थी। यह निर्णय दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, जो कि आम आदमी पार्टी की सरकार और उपराज्यपाल के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है।

पिछले साल का विधेयक

पिछले साल, राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसने दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। इस विधेयक के तहत, दिल्ली सरकार की कुछ महत्वपूर्ण शक्तियाँ उपराज्यपाल को सौंप दी गई थीं, जिससे दिल्ली की राजनीति और प्रशासन में टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। राष्ट्रपति का नया आदेश इस विधेयक के तहत दी गई शक्तियों को और भी विस्तृत करता है, जिससे यह संभावना है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और उपराज्यपाल के बीच टकराव और अधिक बढ़ सकता है।

टकराव की संभावनाएँ

इस नए आदेश के बाद  उपराज्यपाल की नई शक्तियाँ दिल्ली सरकार के निर्णय-प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभा सकती हैं, जो कि आम आदमी पार्टी के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इससे प्रशासनिक निर्णय और नियुक्तियाँ अधिक केंद्रीकृत हो सकती हैं, और यह राजनीतिक निर्णयों पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसके परिणामस्वरूप, दिल्ली के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य में नए विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

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