उत्तर प्रदेश सरकार ने भदोही का नाम 'संत रविदास नगर भदोही' रखकर ऐतिहासिक पहचान और जनआस्था दोनों का सम्मान किया है। वर्ष 1994 में नए जिले के रूप में अस्तित्व में आए इस जनपद का नामकरण विभिन्न सरकारों में बदलता रहा, लेकिन अब दोनों गौरवशाली संदर्भों को एक साथ जोड़ दिया गया है। संत शिरोमणि गुरु रविदास का नाम जुड़ने से समाज के वंचित और दलित वर्ग के प्रति सम्मान प्रकट होता है, वहीं 'भदोही' नाम कायम रहने से प्राचीन भार राजवंश की ऐतिहासिक पहचान और राजभर समाज की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है।
नामकरण के इस निर्णय के साथ ही क्षेत्र को 1,340 करोड़ रूपए से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं की सौगात मिली है। इसमें कोनिया क्षेत्र के लोगों की तीन दशक पुरानी मांग को पूरा करते हुए गंगा नदी पर बनने वाले 1.32 किलोमीटर लंबे पक्के पुल का शिलान्यास भी शामिल है। सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर 300 करोड़ रूपए से अधिक की लागत से बनने वाला यह सेतु भदोही को प्रयागराज से सीधे जोड़ेगा। इससे बरसात के दिनों में आवागमन की समस्या खत्म होगी और आसपास के पांच जिलों की बड़ी आबादी, मरीजों, विद्यार्थियों और सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम रास्ता मिलेगा।
यह पहल विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग और स्थानीय व्यापार के लिए भी अत्यंत फलदायी साबित होगी। 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के साथ-साथ बेहतर सड़क कनेक्टिविटी, विंध्य एक्सप्रेसवे के विस्तार और सुरक्षात्मक माहौल ने वैश्विक बाजार में यहां के उद्यमियों की पहुंच को और आसान बनाया है। ओडीओपी योजना और सिल्क क्लस्टर के जरिए लाखों लोगों को रोजगार देने वाले इस जिले में नए विश्वविद्यालय का लोकार्पण तथा आधारभूत ढांचे का विकास आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोल रहा है।
प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सीएम योगी का यह कदम सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक गौरव और तीव्र बुनियादी विकास का एक दूरगामी एवं सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।