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वाराणसी में देश का पहला 6-लेन रनवे अंडरपास

सक्रिय रनवे के नीचे से गुजरेगा देश का पहला अत्याधुनिक छह-लेन अंडरपास, सड़क और हवाई यातायात का बनेगा अनूठा संगम।

भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी बनारस में स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार कार्य के अंतर्गत देश के पहले सक्रिय (चालू) रनवे के ठीक नीचे से गुजरने वाले छह-लेन के अनूठे अंडरपास का निर्माण कार्य अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राम मोहन नायडू ने इस युगांतकारी परियोजना की प्रगति साझा करते हुए इसे भारत के 'अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे'  का एक अद्भुत और नायाब प्रतीक बताया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-31  पर बनाए जा रहे इस सामरिक अंडरपास की नींव और राफ्ट निर्माण का कार्य सफलतापूर्वक प्रारंभ हो चुका है, जो इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक का एक बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत करता है।

लगभग 250 करोड़ रूपए की भारी-भरकम लागत से आकार ले रहे इस भव्य इंजीनियरिंग चमत्कार की कुल लंबाई करीब 450 मीटर होगी। इस अंडरपास का सबसे अनूठा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण पहलू यह है कि इसे पूरी तरह से एक अभेद्य 'बंकर' या टनल के रूप में निर्मित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने के बाद हवाई अड्डे के ऊपर से विशालकाय विमान पूरी सुरक्षा के साथ सामान्य रूप से उड़ान भरते और उतरते रहेंगे, जबकि ठीक उसी समय टनल के नीचे से राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का काफिला बिना किसी रुकावट या गतिरोध के निर्बाध रूप से गुजरता रहेगा। यह अभूतपूर्व परियोजना देश में सड़क और हवाई यातायात के मध्य सुदृढ़ और सुरक्षित समन्वय स्थापित करने का अपनी तरह का पहला और अनूठा मॉडल है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य वाराणसी हवाई अड्डे की परिचालन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्यधिक विस्तारित करना है। इसके तहत हवाई अड्डे के मौजूदा रनवे की लंबाई को लगभग 2,745 मीटर से बढ़ाकर 4,075 मीटर किया जा रहा है। रनवे के इस व्यापक विस्तार के लिए बीच में आने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को भूमिगत ले जाना अनिवार्य था, जिसके लिए इस छह-लेन अंडरपास की रूपरेखा तैयार की गई। टनल के ऊपरी स्लैब की ढलाई का कार्य निकट भविष्य में पूरा होते ही इसके ऊपर नए रनवे का निर्माण खंड शुरू कर दिया जाएगा। इस विस्तार के पूर्ण होने के बाद वाराणसी में बोइंग-777 जैसे दुनिया के सबसे भारी, बड़े आकार के और अधिक यात्री क्षमता वाले 'वाइड-बॉडी' विमानों का संचालन भी अत्यंत सुगमता से संभव हो सकेगा।

परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के तहत इसे सितंबर 2027 - तीसरी तिमाही तक पूरी तरह से संचालित करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने सभी संबंधित निर्माण और नियामक एजेंसियों को इस परियोजना को तय समय-सीमा के भीतर ही पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए हैं। यह हवाई अड्डा न केवल वाराणसी बल्कि संपूर्ण पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा वैश्विक हब बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी राष्ट्रीय विजन और केंद्र सरकार की पारदर्शी सुशासन नीति से वाराणसी का यह चहुंमुखी विकास और डिजिटल सशक्तिकरण किया जा रहा है, जो न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित करेगा बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए बाबा विश्वनाथ की नगरी की यात्रा को सर्वथा सुगम और अविस्मरणीय बना देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभूतपूर्व राष्ट्रीय विजन और केंद्र सरकार की गतिशील सुशासन नीति के चलते ही वाराणसी को वैश्विक स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर से सुसज्जित कर देश के विकास को नई ऊंचाई दी जा रही है।

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