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लोजपा (रामविलास) का विजय-पथ

लोकसभा में बेमिसाल प्रदर्शन के बाद चिराग के नेतृत्व में NDA के साथ मजबूती से उतरने को तैयार लोजपा (रामविलास)

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में नई ऊर्जा और मजबूत नेतृत्व के साथ एक बार फिर बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) की तैयारी में जुट गई है। 28 नवंबर 2000 को दलितों और वंचितों की आवाज़ बनकर रामविलास पासवान ने इस पार्टी की नींव रखी थी। रामविलास पासवान लगातार केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर मंत्री बने रहे। उनके निधन के तत्काल बाद उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस भी केंद्र सरकार में मंत्री बने। इससे लोजपा की केंद्र में निरंतर प्रभावशाली उपस्थिति सिद्ध होती है।

2021 में रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह 'झोपड़ी' को सुरक्षित रखते हुए दोनों गुटों को अलग मान्यता दी। 2 अक्टूबर, 2021 को चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी किया। इस आदेश में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिन्ह 'बंगला' के उपयोग पर अस्थायी रोक लगा दी गई। इस निर्णय के बाद, चिराग पासवान के नेतृत्व वाले गुट को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) नाम और 'हेलीकॉप्टर' का चुनाव चिन्ह प्रदान किया गया। वहीं, पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाले गुट को राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी नाम और 'सिलाई मशीन' का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। यह आवंटन विवाद के समाधान होने तक, दोनों गुटों द्वारा मांगे गए वैकल्पिक नामों और प्रतीकों पर विचार करने के बाद किया गया था।

एक ओर लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan)हैं, जो एनडीए के साथ मजबूती से जुड़े हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष पशुपति पारस (Pashupati Paras) ने हाल ही में 2025 का विधानसभा चुनाव महागठबंधन (MGB) के साथ लड़ने की घोषणा की है। 2024 के लोकसभा चुनाव (Parliament Election)में चिराग पासवान (Chirag Paswan) की पार्टी एनडीए (NDA) के साथ मैदान में उतरी और सभी 5 सीटें जीतकर जबरदस्त प्रदर्शन किया, जबकि पशुपति पारस चुनाव में नहीं उतरे। स्वयं चिराग पासवान ने भी सफलतापूर्वक अपनी लोकसभा सीट हाजीपुर (Hajipur) से चुनाव लड़ा और उसमें विजय हासिल की।

चिराग पासवान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का 'हनुमान' कहा जाता है और वे इस भूमिका को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी वे लगातार बिहार के मुद्दों से जुड़े रहते हैं और "बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट" नारे के साथ युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। उनका जमीनी संपर्क और नेतृत्व क्षमता उन्हें अगली पीढ़ी का सशक्त नेता बनाती है।

लोजपा (LJP) का विधानसभा में सबसे अच्छा प्रदर्शन फरवरी 2005 में रहा, जब पार्टी ने 29 सीटें जीती थीं और 12.62% वोट प्राप्त किए थे। इसके बाद विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन में गिरावट आई, लेकिन लोकसभा में पार्टी का स्ट्राइक रेट लगातार बेहतरीन रहा है। 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए (NDA) के साथ मिलकर लोजपा (LJP)  ने शानदार प्रदर्शन किया और केंद्र में अपनी प्रभावी भागीदारी को बनाए रखा।

चिराग पासवान (Chirag Paswan) की रणनीति, संगठन पर पकड़ और स्पष्ट विजन ने लोजपा (रामविलास) को नए दौर की राजनीतिक ताकत बना दिया है। जब पार्टी अपने रजत जयंती वर्ष का उत्सव मना रही है, यह केवल स्मरण का अवसर नहीं बल्कि नए संकल्पों की शुरुआत भी है। NDA के साथ मिलकर चिराग पासवान (Chirag Paswan) की लोजपा (LJP) बिहार (Bihar) में सुशासन, विकास और सामाजिक न्याय की नई कहानी लिखने को तैयार है।

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