उत्तर प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा को नया विस्तार देते हुए 18 गुरुकुलम आयुर्वेद कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि कक्षा 10 उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राएं सीधे इनमें प्रवेश ले सकेंगे। साढ़े सात साल का एकीकृत पाठ्यक्रम पूरा करने पर अभ्यर्थियों को आयुर्वेद स्नातक की डिग्री प्रदान की जाएगी। विशेष बात यह है कि इस मार्ग से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नीट परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं होगा।
5 सरकारी और 13 पीपीपी मॉडल पर खुलेंगे संस्थान
राज्य सरकार की योजना के अनुसार, कुल 18 कॉलेजों में से 5 पूर्ण रूप से सरकारी होंगे, जबकि शेष 13 सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत खोले जाएंगे। ये सभी गुरुकुलम केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध रहकर कार्य करेंगे। सरकारी कॉलेजों की स्थापना राज्य में प्रति 5 करोड़ आबादी के मानक पर की जाएगी, जबकि पीपीपी मॉडल के संस्थानों के लिए जनसंख्या संबंधी कोई सीमा लागू नहीं होगी।
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने 'प्री-आयुर्वेद प्रोग्राम फॉर बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी विनियम-2024' के तहत इस पाठ्यक्रम को स्वीकृति दी है। वर्तमान व्यवस्था में BAMS में प्रवेश 12वीं पास करने के बाद नीट की मेरिट सूची के आधार पर होता है। गुरुकुल परंपरा के जरिए दसवीं उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए आयुर्वेद और चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक नया व आसान रास्ता खुला है।
आयुर्वेद की मूल भाषा संस्कृत होने के कारण, इन गुरुकुलों में छात्रों को शुरुआत से ही संस्कृत भाषा, वेद और दर्शन के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान का गहन अध्ययन कराया जाएगा। इससे प्राचीन ग्रंथों को समझने के लिए अनुवाद पर निर्भरता समाप्त होगी। इसके अलावा, इन परिसरों में सामान्य आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों की तरह ही आधुनिक अस्पताल, प्रयोगशालाएं, योग्य शिक्षक और तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे। संस्थान के पूर्ण विकास के लिए कम से कम 15 एकड़ भूमि का मानक तय किया गया है।
प्रदेश के आयुष विभाग ने पीपीपी मॉडल पर गुरुकुलम की स्थापना हेतु इच्छुक निजी संस्थाओं को आमंत्रित करते हुए शासनादेश जारी कर दिया है। NCISM के तय मानकों व भूमि शर्तों को पूरा करने वाले आवेदकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। वर्तमान में संचालित निजी आयुर्वेद कॉलेज भी गुरुकुलम स्थापना के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि सरकारी क्षेत्र के कॉलेजों की स्थापना पर दूसरे चरण में कार्य शुरू होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश प्राचीन ज्ञान एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है। राज्य सरकार का यह कदम प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए द्वार खोलेगा। इसके साथ ही, यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आयुर्वेद को नई पहचान देकर राज्य की प्रगति को गति प्रदान करेगी।