महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के हालिया चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीतिक दिशा को एक नई स्पष्टता प्रदान की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 2,869 सीटों में से 1,425 सीटों पर अपना परचम लहराया है। यह जीत न केवल भाजपा की संगठनात्मक शक्ति को दर्शाती है, बल्कि 2024 के अंत में दोबारा मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद देवेंद्र फडणवीस की रणनीतिक कुशलता पर जनता की मुहर भी लगाती है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (बीएमसी) में भाजपा का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा ने 89 सीटें जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है, जबकि उनकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे) ने 29 सीटें हासिल की हैं। मुंबई के मतदाताओं ने महायुति गठबंधन की विकासोन्मुखी नीतियों और बुनियादी ढांचे में सुधार के विजन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। कुल 2,869 सीटों पर हुए इस मुकाबले में भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 1,425 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने 399 सीटों पर जीत दर्ज की है। विपक्षी दलों की बात करें तो कांग्रेस के खाते में 324 सीटें आई हैं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) 167 सीटें जीतने में सफल रही। इसके अतिरिक्त, शिवसेना-यूबीटी को 155 सीटें, एनसीपी-शरद पवार गुट को 36, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को 13 और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
पुणे और नागपुर जैसे महत्वपूर्ण महानगरों में भी भाजपा का दबदबा साफ दिखाई दिया। पुणे नगर निगम चुनाव में पार्टी ने 119 सीटों के साथ विशाल बहुमत प्राप्त किया है, जो इस क्षेत्र में पार्टी के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। वहीं, नागपुर की 151 सदस्यीय महानगरपालिका में भाजपा ने 102 सीटें जीतकर अपनी लोकप्रयिता को पुनः स्थापित किया है। इसके साथ ही नासिक में 72 सीटें और छत्रपति संभाजीनगर में 57 सीटें जीतकर भाजपा ने राज्य के हर कोने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
चुनावी आंकड़ों के अनुसार, महायुति गठबंधन ने 29 में से 25 नगर निगमों में जीत दर्ज की है। भाजपा अब 17 महानगरपालिकाओं में अपने दम पर महापौर बनाने की स्थिति में है। अन्य प्रमुख शहरों जैसे नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और कोल्हापुर में भी गठबंधन का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। शिवसेना ने 399 सीटें और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 167 सीटें जीतकर गठबंधन की ताकत को और अधिक मजबूती प्रदान की है।
यह चुनावी सफलता राज्य में 'डबल इंजन' सरकार की योजनाओं और सुशासन की जीत मानी जा रही है। मतदाताओं ने विकास, स्थिरता और भविष्य की प्रगति को प्राथमिकता देते हुए महायुति के पक्ष में जनादेश दिया है। लातूर, पनवेल, सोलापुर और सांगली जैसे शहरों से आए परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि जनता महाराष्ट्र को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के साथ एकजुट है।
इस पूरे चुनाव का सबसे ऐतिहासिक पहलू देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (बीएमसी) के परिणाम रहे हैं। पार्टी के 45 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंची है। गौरतलब है कि 1980 में पार्टी के गठन के बाद से भाजपा ने 1992 से 2017 तक लगातार शिवसेना को समर्थन दिया था, लेकिन इस बार भाजपा ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। अपनी सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की 29 सीटों के साथ मिलकर महायुति ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। मुंबई के मेयर पद का इतिहास देखें तो अंतिम बार इस पद पर शिवसेना की किशोरी पेडनेकर आसीन थीं, जिनका कार्यकाल 8 मार्च 2022 को समाप्त हुआ था। उसके बाद से बीएमसी में किसी मेयर का चुनाव नहीं हो सका और प्रशासन की कमान नगर आयुक्त के हाथों में रही। मेयर का कार्यकाल 2.5 वर्ष का होता है, जबकि पार्षद 5 वर्ष के लिए चुने जाते हैं। अब लगभग चार साल के अंतराल के बाद मुंबई को नया मेयर मिलने जा रहा है, और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह पद भाजपा के खाते में जाने की पूरी संभावना है।
मतदाताओं ने विकास, स्थिरता और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विजन को चुनकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे महाराष्ट्र को प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते देखना चाहते हैं।