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महाराष्ट्र में यूसीसी की तैयारी

समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति बनाएगी महायुति सरकार।

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में इस बात की आधिकारिक घोषणा करते हुए गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में यूसीसी विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति उत्तराखंड सहित देश के उन अन्य राज्यों के यूसीसी मॉडलों का बारीकी से और विस्तृत अध्ययन करेगी जहां इसे लेकर काम हुआ है, और फिर अपनी व्यापक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। सरकार इस विषय को पूरी गंभीरता से ले रही है और समिति की इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई और अंतिम निर्णय सुनिश्चित किया जाएगा।

इस बड़े फैसले की पृष्ठभूमि विधानसभा में उस वक्त तैयार हुई जब नासिक से भाजपा विधायक देवयानी सुहास फरांदे ने मुस्लिम महिलाओं से जुड़ी तीन तलाक की समस्याओं और उनके कानूनी संरक्षण का गंभीर मसला सदन के सामने रखा। इस विषय पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और भारी हंगामा भी देखने को मिला। सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने साफ तौर पर कहा कि महायुति सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता विधेयक को प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिल सकें।

विधेयक की आवश्यकता पर बल देते हुए मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि तीन तलाक से संबंधित प्रताड़ना की शिकायतें केवल किसी एक क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र से इस तरह के मामले लगातार सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में ऐसी 42 शिकायतें जांच में बिल्कुल सही पाई गईं, जिसके बाद मुस्तैदी दिखाते हुए कुल 137 आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई। इसके साथ ही साल 2025 से लेकर अब तक इस सामाजिक कुप्रथा और कानून उल्लंघन के मामले में 95 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि यूसीसी आने से ऐसी विसंगतियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी और समाज के हर वर्ग की महिलाओं को समान रूप से कानूनी न्याय मिल सकेगा।

इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता पर सबसे पहले मेरिट और गुणों के आधार पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना था कि कानून और व्यवस्था की समानता केवल सामाजिक नियमों तक सीमित न रहकर सभी क्षेत्रों में समान रूप से दिखनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली हो या फिर राज्य के भीतर विकास निधियों का समान वितरण। बहरहाल, सरकार इस कानून को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।

महाराष्ट्र सरकार का यह लोक-कल्याणकारी निर्णय साफ तौर पर दर्शाता है कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों और राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुदृढ़ व न्यायप्रिय नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए पूरी दृढ़ता के साथ समर्पित है।

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