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मध्य प्रदेश के स्कूलों में 3 दिन मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अनिवार्य रूप से मनाया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय और स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किया।

स्कूलों में अनिवार्य रूप से होगा आयोजन

मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अनिवार्य रूप से मनाया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय और स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रदेशभर के विद्यालयों में 1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके विचारों, गीता के संदेश और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराना है। स्कूलों को निर्धारित अवधि में विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ अलग-अलग सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कृष्ण लीला और गीता ज्ञान पर होंगे कार्यक्रम

तीन दिवसीय आयोजन के दौरान विद्यालयों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित कृष्ण लीला का मंचन किया जाएगा। इसके साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान और संदेश पर आधारित नाटक, संवाद तथा अन्य प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। विद्यार्थियों के लिए संगीत, भजन, नृत्य और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कर्तव्य, अनुशासन, कर्मयोग, नेतृत्व, मित्रता और सामाजिक मूल्यों को विद्यार्थियों तक सरल और रचनात्मक तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

सांदीपनि स्कूलों में गुरु-शिष्य परंपरा पर विशेष कार्यक्रम

प्रदेश के सांदीपनि स्कूलों में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उज्जैन के प्रसिद्ध सांदीपनि आश्रम की परंपरा को ध्यान में रखते हुए इन विद्यालयों में गुरु-शिष्य संबंध और भारतीय शिक्षा परंपरा से जुड़े आयोजनों की अलग रूपरेखा तैयार की गई है। कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन, ज्ञान प्राप्ति और भारतीय शिक्षण परंपरा के महत्व से अवगत कराया जाएगा।

संस्कृति और शिक्षा को जोड़ने की पहल

तीन दिवसीय जन्माष्टमी आयोजन के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग का प्रयास धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के साथ शैक्षणिक और नैतिक मूल्यों को भी जोड़ना है। कृष्ण लीला, गीता ज्ञान, कला और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की विभिन्न विशेषताओं से परिचित कराया जाएगा। 1 से 3 सितंबर तक चलने वाले इन कार्यक्रमों में प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी देखने को मिलेगी।

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