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भारतीय एथलीटों के AI उपयोग पर रोक

सोशल मीडिया पर एआई सामग्री और विवादित पोस्टों से बचने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ ने पहली बार जारी की सख्त गाइडलाइंस।

ग्लासगो में आयोजित होने जा रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 में हिस्सा लेने जा रहे भारतीय एथलीटों, सपोर्ट स्टाफ और खेल संघों के पदाधिकारियों के लिए एक अभूतपूर्व फैसला लिया गया है। भारतीय ओलंपिक संघ ने सभी खिलाड़ियों को हिदायत दी है कि वे खेलों के दौरान सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सामग्री या डीपफेक कंटेंट का उपयोग नहीं करेंगे। यह खेल इतिहास में पहली बार है जब ओलंपिक, एशियाई खेल या राष्ट्रमंडल खेल जैसे किसी बड़े वैश्विक मंच पर सोशल मीडिया हैंडलिंग के लिए एआई कंटेंट के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है। आईओए ने यह कड़ा कदम सोशल मीडिया पर होने वाली डिजिटल गड़बड़ियों, कॉपीराइट विवादों और खेल आयोजकों की ओर से की जाने वाली किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए उठाया है।

इस नई डिजिटल आचार संहिता के तहत खिलाड़ियों को केवल एआई के उपयोग से ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह की विवादास्पद पोस्ट या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने से भी सख्ती से मना किया गया है। आईओए द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, खेल आयोजनों के दौरान खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत प्रायोजकों या ब्रांडों का व्यावसायिक प्रचार सोशल मीडिया पर नहीं कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, एथलीटों की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बिना पूर्व अनुमति के किसी अन्य देश के खिलाड़ियों की तस्वीरें या वीडियो नहीं बनाएंगे। इन नियमों का उद्देश्य खेल भावना को बनाए रखना और सोशल मीडिया पर किसी भी गैर-जरूरी विवाद को जन्म लेने से रोकना है।

इस बार ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन काफी सीमित और नए नियमों के साथ किया जा रहा है, जिसमें भारत का करीब 126 एथलीटों का मजबूत दल हिस्सा ले रहा है। चूंकि इस बार खेलों के बजट और आकार को छोटा किया गया है, इसलिए आईओए और खेल मंत्रालय का पूरा ध्यान खिलाड़ियों के प्रदर्शन और उनकी अनुशासनबद्ध छवि पर है। सोशल मीडिया पर एआई के बढ़ते दुरुपयोग और भ्रामक कंटेंट को रोकने के लिए तैयार किया गया यह सख्त माइक्रो-मैनेजमेंट प्लान भारतीय दल को बाहरी डिजिटल दबावों से दूर रखकर खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।

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