Latest

बिहार: सत्ता पक्ष की नई टीम

विनोद नारायण झा बने विधानसभा में मुख्य सचेतक, विधान परिषद में राजेंद्र प्रसाद गुप्ता और जनक राम को मिली बड़ी जिम्मेदारी।

बिहार की सियासत में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती और विधायी कार्यों में अनुशासन बनाए रखने के लिए अपने अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री और मधुबनी की बेनीपट्टी सीट से विधायक विनोद नारायण झा को बिहार विधानसभा में सत्ताधारी दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। जेपी आंदोलन की उपज रहे झा मिथिलांचल के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ रही है। उनके साथ कृष्ण कुमार ऋषि, कुमार शैलेंद्र, गायत्री देवी और रत्नेश कुमार कुशवाह को सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि सहयोगी दल लोजपा (रामविलास) की ओर से राजू तिवारी को सचेतक बनाया गया है।

विनोद नारायण झा का राजनीतिक सफर करीब चार दशकों का है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से की थी और आपातकाल के दौरान जेल भी गए। वे 2005 से अब तक तीन बार बेनीपट्टी विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और पूर्व में पीएचईडी विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी नियुक्ति को आगामी विधायी सत्रों में पार्टी की रणनीति को धार देने और विधायकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुभव का लाभ पार्टी को सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट में मिलने की उम्मीद है।

विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद में भी पार्टी ने अपने नेतृत्व को विस्तार दिया है। वरिष्ठ नेता राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को विधान परिषद में भाजपा का उपनेता बनाया गया है। गुप्ता 2006 से ही परिषद के सदस्य के रूप में सक्रिय हैं और पार्टी के एक निष्ठावान सिपाही माने जाते हैं। उनके साथ ही पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री जनक राम को विधान परिषद में मुख्य सचेतक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनक राम गोपालगंज से लोकसभा सदस्य रह चुके हैं और बिहार सरकार में एससी-एसटी कल्याण मंत्री के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।

इस सांगठनिक फेरबदल में गठबंधन सहयोगियों का भी सम्मान रखा गया है। लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी को भी सचेतक की जिम्मेदारी दी गई है। राजू तिवारी ने 2015 के बाद हालिया चुनावों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और गोविंदगंज विधानसभा सीट से बड़ी जीत हासिल की है। भाजपा और सहयोगियों का यह नया विधायी ढांचा न केवल सरकार की नीतियों को सदन में प्रभावी ढंग से रखने में मदद करेगा, बल्कि विपक्षी दलों के हमलों का सामना करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच भी तैयार करेगा।

राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची

Silicon warfare: AI, autonomous swarms redefine US-Iran conflict

India’s High-Stakes Balancing Act Amid Escalating US-Iran Tensions

Telugu Nadu or Andhra Pradesh:Politics behind a Name Change Debate

Trifurcated Hyderabad enters high-stakes municipal political era