बिहार पुलिस ने राज्य के प्रमुख शहरों में कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूत करने के लिए 24.50 करोड़ रुपये की लागत से 50 अत्याधुनिक ड्रोन खरीदने की योजना को स्वीकृति दी है। इस परियोजना में 60 प्रतिशत फंड केंद्रीय गृह मंत्रालय की पुलिस आधुनिकीकरण योजना द्वारा दिया जा रहा है और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन कर रही है। ये ड्रोन लाइव वीडियो फीड सीधे कंट्रोल रूम को भेजेंगे, जिससे घटनाओं के सटीक साक्ष्य जुटाने और त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। फुटेज में जीपीएस लोकेशन और सटीक समय दर्ज होने के कारण डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में मजबूती से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
सुरक्षा बेड़े में दो तरह के ड्रोन शामिल किए जा रहे हैं। पहले वर्ग में लॉ एंड ऑर्डर और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 40 ड्रोन खरीदे जाएंगे, जिनकी प्रति यूनिट कीमत 45 लाख रुपये होगी। इनका संचालन बिहार पुलिस की विशेष ड्रोन यूनिट करेगी और इसका इस्तेमाल रैलियों, त्योहारों तथा जाम की स्थिति में रूट डायवर्जन के लिए होगा। दूसरे वर्ग में माओवाद विरोधी और स्पेशल ऑपरेशंस के लिए 10 सुपर ड्रोन शामिल हैं, जिनकी प्रति यूनिट कीमत 65 लाख रुपये है। नाइट विजन और थर्मल इमेजिंग कैमरों से लैस ये सुपर ड्रोन जंगली और दुर्गम इलाकों में छिपे अपराधियों की खोज में काम आएंगे।
पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत देश के अन्य राज्यों को भी केंद्र सरकार द्वारा 60:40 के फंडिंग अनुपात में सुरक्षा और तकनीक अपग्रेड करने का बजट प्रदान किया जाता है। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु (चेन्नई पुलिस), दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्य भी इसी केंद्रीय फंडिंग मॉडल का उपयोग करके अपनी पुलिस के लिए हाई-टेक ड्रोन, कंट्रोल रूम और निगरानी उपकरण खरीद रहे हैं। बिहार को मिला यह फंड इसी राष्ट्रीय पुलिस आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। यह कदम यह दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर तकनीक के सही इस्तेमाल से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।