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बर्फीले शिखरों के बीच आकार ले रहा है एशिया का नया ग्लोबल हब

सामरिक और आर्थिक प्रगति का नया अध्याय, केंद्र सरकार की दूरगामी सोच से बदलेगी तस्वीर...

उत्तर भारत के पहाड़ों में केंद्र सरकार एक नए और क्रांतिकारी युग की शुरुआत करने जा रही है। स्विट्जरलैंड की खूबसूरत वादियों की तर्ज पर अब लद्दाख के द्रास और कश्मीर के सोनमर्ग के बीच एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का विंटर रिसॉर्ट और कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की तैयारी चल रही है। यह भव्य प्रोजेक्ट न केवल पर्यटन के क्षेत्र में क्रांति लाएगा, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक व्यापार, कूटनीति और बड़े सम्मेलनों के लिए एशिया के सबसे बड़े मंच के रूप में जाना जाएगा।

जोजिला टनल: प्रगति का नया प्रवेश द्वार

यह पूरी योजना कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में जोड़ने वाली विश्व की सबसे ऊंची निर्माणाधीन जोजिला टनल के दोनों छोरों (बालटाल और मीनामार्ग) पर आकार लेने जा रही है। सैकड़ों एकड़ जमीन पर फैलने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए अब दुनिया भर के राजनेता, कॉर्पोरेट दिग्गज, अर्थशास्त्री और वैज्ञानिक एक ही छत के नीचे बैठकर वैश्विक मुद्दों पर मंथन कर सकेंगे।

केंद्र सरकार की दूरदर्शी सोच और 'सबका साथ' का संकल्प

इस सीमावर्ती क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए केंद्र की भाजपा सरकार लगातार प्रयासरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी विकास नीति और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के संकल्प का ही नतीजा है कि आज यह ऐतिहासिक परियोजना धरातल पर उतरने जा रही है। यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के मजबूत इरादों को साफ दर्शाता है।

केंद्र सरकार की इस विकासवादी सोच की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें प्रगति और परंपरा का बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस पर पूर्ण सहमति बनी है।

विकास भी, विरासत भी: इस परियोजना में केंद्र सरकार लद्दाख के छठे शेड्यूल की चिंताओं और स्थानीय जनजातीय पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति से कोई समझौता किए बिना, सतत विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्थानीय हितों की सुरक्षा और पारदर्शी नीतियां

विवाद-मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लद्दाख और कश्मीर प्रशासन के बीच जमीन ट्रांसफर के नियमों की स्पष्ट रूपरेखा तय की गई है। स्थानीय लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया गया है कि बाहरी कंपनियों को जमीनें केवल लीज पर दी जाएंगी, जिससे जमीन का मालिकाना हक स्थानीय निवासियों के पास ही सुरक्षित रहेगा।

यह परियोजना नए भारत की उस सशक्त तस्वीर को बयां करती है, जहां सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र अब देश की मुख्यधारा से जुड़कर वैश्विक पटल पर चमकने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार का यह प्रयास कश्मीर और लद्दाख के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर खोलेगा और इस पूरे क्षेत्र को समृद्धि की एक नई राह पर ले जाएगा।

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