1947 में मिली थी भारत को आजादी
15 अगस्त 1947 केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के इतिहास में नए युग की शुरुआत का दिन था। लंबे स्वतंत्रता संग्राम, असंख्य आंदोलनों और हजारों बलिदानों के बाद देश ने ब्रिटिश शासन की बेड़ियां तोड़ीं। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे अनेक नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष ने देश को आजादी की मंजिल तक पहुंचाया। इसी दिन भारत ने पहली बार एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी सुबह देखी। स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराकर स्वतंत्र भारत के नए अध्याय की शुरुआत की। स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर संविधान सभा में उनका ऐतिहासिक संबोधन देश की उम्मीदों और नए भविष्य की आकांक्षाओं का प्रतीक बना। आगे चलकर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देश को संबोधित करने की परंपरा स्वतंत्रता दिवस की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बन गई।
संघर्षों से उपलब्धियों तक पहुंचा भारत
स्वतंत्रता के बाद के दशकों में भारत ने कृषि से लेकर अंतरिक्ष तक लंबा सफर तय किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक, रक्षा, उद्योग, परिवहन और डिजिटल क्षेत्र में हुए बदलावों ने देश की तस्वीर बदली। कभी खाद्यान्न संकट से जूझने वाला भारत कृषि उत्पादन में मजबूत हुआ, वहीं अंतरिक्ष अभियानों और तकनीकी उपलब्धियों ने दुनिया में उसकी अलग पहचान बनाई। लोकतांत्रिक व्यवस्था के निरंतर विस्तार ने भी भारत की विकास यात्रा को मजबूती दी।
15 अगस्त 2026 को भारत स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे करते हुए 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। देशभर में तिरंगा फहराया जाएगा, राष्ट्रगान गूंजेगा और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया जाएगा। 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके बाद वह लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे और अपने भाषण में सरकार की उपलब्धियों, विकास योजनाओं तथा देश के भविष्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे।