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दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग

एक दशक में तैयार होने के बाद अब 210 मीट्रिक टन वजनी और 33 फीट ऊंचा शिवलिंग 4 जनवरी तक पूर्वी चंपारण पहुंचेगा।

दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, जो आस्था और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है, नए साल में फरवरी तक बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित चकिया के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होने वाला है। इस गौरवशाली शिवलिंग ने 21 नवंबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से अपनी यात्रा शुरू की थी और अब तक करीब 1635 किलोमीटर का सफर तय कर चुका है। 4 जनवरी तक इसके विराट रामायण मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, और महाराष्ट्र होते हुए मध्य प्रदेश पहुंच गया है, और अब जल्द ही यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा, जहां विभिन्न स्थानों पर इसके स्वागत की भव्य योजनाएं बनाई गई हैं।

भक्तों का अपार उत्साह और स्वागत की तैयारी

मध्य प्रदेश के बाद, बनारस और मोहनिया होते हुए यह शिवलिंग बिहार में प्रवेश करेगा। बिहार में भी इसके स्वागत के लिए जोरदार तैयारियां हैं। महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, यात्रा के दौरान भक्त शिवलिंग के स्वागत और पूजा-अर्चना के लिए हर पड़ाव पर भारी संख्या में जमा हो रहे हैं। जहां भी 96 चक्का वाला ट्रक खड़ा होता है, वहीं पर भक्तों की भीड़ पूजा के लिए उमड़ पड़ती है। बिहार में आरा, सकड्डी, छपरा, मसरख, मोहम्मदपुर, कजरिया, केसरिया जैसे 10 से 15 महत्वपूर्ण स्थानों पर इस विशाल शिवलिंग का स्वागत करने की योजना है, जिसके बाद यह अपने गंतव्य, विराट रामायण मंदिर, पहुंचेगा।

अद्वितीय निर्माण की गाथा

यह अद्वितीय शिवलिंग एक सिंगल ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से बना है, जिसकी ऊंचाई 33 फीट है। इसका कुल वजन 210 मीट्रिक टन है, और इस पर विशेष रूप से 108 सहस्त्रलिंगम उकेरे गए हैं। तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते दस वर्षों से इसका निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण करने वाली कंपनी के मुताबिक, इस पर लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस विशाल शिवलिंग को सड़क मार्ग से विशेष रूप से तैयार किए गए 96 चक्का वाले ट्रक से ले जाया जा रहा है।

विश्व के सबसे बड़े मंदिर का निर्माण कार्य जारी

यह शिवलिंग जिस विराट रामायण मंदिर में स्थापित होगा, उसका निर्माण भी अपने आप में एक ऐतिहासिक परियोजना है। महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से बन रहे इस मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग और गर्भ गृह का पाइलिंग का काम पूरा हो चुका है। आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा, जो इसे विश्व का सबसे बड़ा मंदिर बना देगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे, जिसमें मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। सायण कुणाल ने बताया कि 20 जून 2023 को शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और यह मंदिर पटना से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' है और इसमें 4 आश्रम भी बनाए जाएंगे, जो इसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और भी खास बना देंगे।

यह लेख दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की आगामी स्थापना और बिहार के पूर्वी चंपारण में बन रहे विराट रामायण मंदिर के बारे में जानकारी देता है। शिवलिंग, जिसका वजन 210 मीट्रिक टन है और ऊंचाई 33 फीट है, एक सिंगल ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से तमिलनाडु में 10 वर्षों में बनाया गया है और इस पर 108 सहस्त्रलिंगम तैयार किए गए हैं। 21 नवंबर को अपनी यात्रा शुरू करने के बाद, यह शिवलिंग तमिलनाडु से मध्य प्रदेश होते हुए 4 जनवरी तक बिहार के चकिया स्थित विराट रामायण मंदिर पहुंचने की उम्मीद है, जहां फरवरी तक इसे स्थापित कर दिया जाएगा। यात्रा के दौरान, खासकर बिहार में 10 से 15 स्थानों पर, भक्तों द्वारा इसके भव्य स्वागत की योजना है। इस शिवलिंग को 96 चक्का वाले ट्रक से ले जाया जा रहा है और इसकी निर्माण लागत करीब 3 करोड़ रुपये आई है। विराट रामायण मंदिर, जिसका निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा किया जा रहा है, 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा, जिसमें 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे, और इसका मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा होगा। इस मंदिर का निर्माण कार्य 2023 में शुरू हुआ था और यह आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके पूरा होने पर यह विश्व का सबसे बड़ा मंदिर बन जाएगा।

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