उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से आखिरकार कॉमर्शियल उड़ानों की शुरुआत हो गई है, जिससे पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। सोमवार को लखनऊ से इंडिगो की पहली फ्लाइट ने जैसे ही यहां लैंड किया, वाटर कैनन से उसका भव्य स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक दिन की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली जब एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले 170 किसान, जिनमें 20 महिला किसान भी शामिल थीं, एक स्पेशल फ्लाइट से नोएडा से लखनऊ रवाना हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में इन सभी अन्नदाताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनसे सीधा संवाद किया। इस यात्रा से अभिभूत किसानों और आम यात्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की जमकर तारीफ की। लोगों का कहना है कि जिस जमीन पर कभी वे खेती करते थे, आज वहीं से उड़ान भरकर वे मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं। जनता और किसानों के इस भारी समर्थन और खुशी को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में विकास का यह सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा और जनता विकास के नाम पर वोट देकर एनडीए सरकार को इसका बड़ा फायदा पहुंचा सकती है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित यह एयरपोर्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को किया था और इसका उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ। महज 5 सालों में बनकर तैयार हुए इस एयरपोर्ट के पहले फेज का निर्माण कार्य करीब 1334 हेक्टेयर (लगभग 3300 एकड़) जमीन पर पूरा हो चुका है, जिस पर करीब 11,200 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस पहले चरण के शुरू होने से जहां से हर साल करीब 1.2 करोड़ यात्री सफर कर सकेंगे। जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतरीन और आधुनिक बनावट है, जहां एंट्री करने के बाद महज 20 मिनट से भी कम समय में बोर्डिंग संभव हो सकेगी, जो दिल्ली के टी-3 एयरपोर्ट के मुकाबले यात्रियों का काफी समय बचाएगी। शुरुआती दौर में देश के 45 शहरों के लिए यहां से करीब 65 कॉमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन शुरू होने जा रहा है, जिसमें इंडिगो और अकासा एयर जैसी प्रमुख कंपनियां दिल्ली-एनसीआर को दुनिया के बड़े एविएशन हब से जोड़ने के लिए तैयार हैं।
कनेक्टिविटी के मामले में भी यह एयरपोर्ट बेहद खास और बेजोड़ है। इसे यमुना एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधे जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक स्टेशन भी इसके पास प्रस्तावित है। दिल्ली और गाजियाबाद से सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए करीब 16 हजार करोड़ की लागत से 71.1 किलोमीटर लंबा आरआरटीएस (RRTS) कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिसमें 11 स्टेशन होंगे। भविष्य में इस एयरपोर्ट को कुल 4 फेज में तैयार किया जाएगा, जिसमें 5 रनवे और जरूरत पड़ने पर छठा रनवे भी बनाया जा सकेगा। कुल 52 स्क्वायर किलोमीटर में प्रस्तावित होने के कारण, चारों फेज का काम पूरा होने के बाद यह एरिया और रनवे के लिहाज से चीन के बीजिंग डेक्सिंग और शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट को पछाड़कर एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जाएगा, जो उत्तर प्रदेश को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाएगा।