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किशनगंज में सेना के दो नए स्थायी स्टेशन

'चिकन नेक' और पूर्वी सीमा की सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती देगी भारतीय सेना की यह नई ऐतिहासिक रणनीतिक पहल।

देश की सुरक्षा और सामरिक नीति के लिहाज से बिहार का सीमांचल क्षेत्र अब एक नए और बेहद मजबूत सैन्य केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। भारत-नेपाल सीमा से सटे तथा पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश के बेहद निकट स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील किशनगंज जिले में भारतीय सेना के दो नए स्थायी आर्मी स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। देश के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले बेहद महत्वपूर्ण 'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा को अभूतपूर्व कवच देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार और भारतीय सेना ने इस ऐतिहासिक परियोजना को मिशन मोड पर आगे बढ़ाया है। पूर्वी कमान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के आपसी तालमेल से इस दिशा में तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं लगातार जारी हैं।

इस महा-परियोजना के क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन द्वारा ठाकुरगंज और कोचाधामन प्रखंडों के अंतर्गत लगभग 400 एकड़ की विशाल भूमि को चिह्नित किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी क्षेत्र में सेना के लिए करीब 203 एकड़ जमीन का चयन किया गया है, जबकि कोचाधामन और बहादुरगंज अंचल के सकोर-नटुवापाड़ा क्षेत्र में भी लगभग 200 एकड़ भूमि को चिह्नित किया गया है। किशनगंज के अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार ने पुष्टि की है कि प्रस्तावित स्थलों का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक आर्मी स्टेशन केवल सैनिकों की बैरक तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसे एक पूर्ण 'सैन्य नगर' के रूप में विकसित किया जाता है। इसमें आधुनिक सैन्य मुख्यालय, उन्नत प्रशिक्षण एवं अभ्यास मैदान, हथियार और गोला-बारूद के सुरक्षित भंडार, हाई-टेक संचार एवं कंट्रोल सेंटर तथा बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था शामिल होती है। किशनगंज की भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यहाँ सेना की स्थायी मौजूदगी से सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी क्षमता बढ़ेगी, संकट के समय सैनिकों की त्वरित तैनाती संभव होगी और घुसपैठ या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे की स्थिति में सेना तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेगी।

केंद्र सरकार के इस दृढ़ संकल्प से न केवल सीमापार की अवांछित गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी, बल्कि इस सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण से सीमांचल में बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना (सड़क, बिजली, जलापूर्ति) का विकास होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी गति मिलेगी और क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित भारत के विजन को धरातल पर उतारता हुआ सेना का यह नया सामरिक कवच आने वाले वर्षों में किशनगंज को पूरे पूर्वी भारत का एक अभेद्य सैन्य केंद्र बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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