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कमल रूपी हाईटेक बनेगा यूपी का नया विधानभवन

गोमतीनगर में 5,200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह भव्य परिसर अगले 100 वर्षों की विधायी और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करेगा।

लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की 200 एकड़ जमीन पर उत्तर प्रदेश का नया विधानभवन परिसर आकार लेने जा रहा है। लगभग 5,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह परिसर केवल एक प्रशासनिक इमारत नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध लोकतांत्रिक पहचान और स्थापत्य कला का अनुपम प्रतीक बनेगा। भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम के रूप में डिजाइन किए जा रहे इस भवन की सबसे मुख्य आकर्षण इसकी कमल के फूल के आकार जैसी भव्य वास्तुकला होगी। ऊपर से देखने पर इसकी संरचना कमल की पंखुड़ियों की भांति दिखाई देगी, जिसके केंद्रीय भाग में सदन की कार्यवाहियाँ संचालित होंगी और आसपास प्रशासनिक इकाइयां स्थित होंगी।

लगभग 35 लाख वर्गफुट निर्मित क्षेत्र में फैला यह परिसर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें 700 सीटों वाली विधानसभा, 200 सीटों वाली विधान परिषद और 1,000 प्रतिनिधियों की क्षमता वाला एक विशाल संयुक्त अधिवेशन सभागार बनाया जाएगा। वर्तमान में पुरानी विधानसभा में 403 और विधान परिषद में 100 सीटें हैं, ऐसे में भविष्य में परिसीमन या विधायकों की संख्या बढ़ने पर भी यह नया ढांचा पूरी तरह सक्षम रहेगा। निर्मित क्षेत्र के 39 प्रतिशत हिस्से का उपयोग विधायी गतिविधियों के लिए होगा, जबकि शेष भाग सचिवालय, ज्ञान केंद्र, साझा सेवाओं और तकनीकी कार्यों के लिए आबंटित किया गया है।

इस नए विधानभवन की एक बेहद अनूठी विशेषता यहाँ की जिलावार बैठक व्यवस्था होगी। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले जनप्रतिनिधियों के बैठने के लिए सदन के भीतर विशेष सेक्टर बनाए जाएंगे, जिससे समन्वय, पहचान और प्रशासनिक कार्यों में काफी सुगमता आएगी। भारतीय विधायी इतिहास में इस प्रकार का प्रयोग एक नए मानक के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यावरण और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखते हुए परिसर में 5,000 वाहनों के विशाल पार्किंग स्थल के साथ इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और सौर ऊर्जा आधारित हरित संरचनाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और दूरदर्शी नेतृत्व में आकार ले रहा यह दूरगामी प्रोजेक्ट न केवल राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नई गति देगा, बल्कि आने वाले 100 वर्षों तक उत्तर प्रदेश की लोकतांत्रिक व विधायी आकांक्षाओं का मजबूत स्तंभ बना रहेगा।

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