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एक देश, एक समय

भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और प्रशासनिक सटीकता को मजबूत करने के उद्देश्य से देश भर में भारतीय मानक समय को अनिवार्य करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया ।

केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने लीगल मैट्रोलॉजी (भारतीय मानक समय) नियम 2026 की अधिसूचना जारी करते हुए पूरे देश में 'एक देश, एक समय' की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में एक दूरगामी और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। यद्यपि भारत भर में जनसामान्य की घड़ियाँ एक ही समय दर्शाती हैं, लेकिन बैकएंड पर देश के बैंकिंग क्षेत्र, पावर ग्रिड, दूरसंचार नेटवर्क, डेटा सेंटर और डिजिटल सर्वर समय के सटीक रिकॉर्ड के लिए अब तक अमेरिकी जीपीएस  जैसे विदेशी उपग्रह प्रणालियों पर निर्भर थे। नए नियमों के प्रभावी होने के बाद विदेशी समय स्रोतों पर भारत की यह तकनीकी निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और देश के सभी कानूनी, प्रशासनिक, व्यावसायिक तथा डिजिटल तंत्रों के लिए केवल भारतीय मानक समय ही एकमात्र वैधानिक और अनिवार्य मानक संदर्भ होगा।

इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से पूर्ण सक्षम बनाने के लिए जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी में अत्यंत उन्नत 'व्हाइट रैबिट' तकनीक पर आधारित IST प्रदर्शन नेटवर्क का सफल परीक्षण किया गया, जो हजारों डिजिटल उपकरणों के बीच एक नैनोसेकंड से भी कम समय का सटीक तालमेल स्थापित कर सकती है। नए नियमों के अनुपालन के लिए सरकार ने सभी मंत्रालयों, वित्तीय संस्थानों और निजी कंपनियों को अपने सर्वर एवं प्रणालियों को IST से समायोजित करने हेतु 180 दिनों का पर्याप्त समय दिया है। यह पहल न केवल वित्तीय लेनदेन में मिलीसेकंड के अंतर से होने वाली धोखाधड़ी और तकनीकी त्रुटियों को रोकेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल डेटा प्रबंधन को एक अभेद्य सुरक्षा आवरण भी प्रदान करेगी।

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